"How few there are who have courage enough to on their faults , or resolution enough to mend them " by Benjamin Franklin
असफलता , यह वह शब्द है जो किसी भी व्यक्ति के मनोमस्तिष्क को झकझोर देती है | कोई भी व्यक्ति अपने किसी भी कार्यक्षेत्र में कभी भी असफल होना नही चाहता है , और इसका कारन भी सरल सा है - यह दुनिया सफल व्यक्ति की ही जय -जयकार करती है और असफल व्यक्ति को सदैव उपेक्षा की दृष्टि से देखती है |
हर व्यक्ति के कार्य का , उसके जीवन का ध्येय सफलता ही होता है किन्तु यह भी समझना और स्वीकार करना आवश्यक है की असफलता हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, वास्तविकता तो यह है की असफलताए व्यक्ति को वह अनुभव प्रदान करती है जो उसे सफलता की और अग्रसर करते है , अतः असफलता से घबराना नही चाहिए , बल्कि असफलता से मिले अनुभवों का उपयोग करते हुए लक्ष्य की और आगे बढ़ते रहना चाहिए |
e= mc2 जैसे सिद्धांत के प्रतिपादक महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन अपनी 4 वर्ष की आयु तक बोल नही पाते थे, और 7 वर्ष की आयु तक वह निरक्षर थे , लोग उन्हें मानसिक रूप से अल्पबुद्धि मानते थे | इसी प्रकार हेनरी फोर्ड पांच बिजनेस में सफल नही हो सके थे , इलेक्ट्रिक बल्ब सहित अनेक महँ आविष्कारो के आविष्कारकर्ता थॉमस अल्वा एडिसन केवल कुछ माह की ही विद्यालयी शिक्षा प्राप्त कर सके | और वह अपने परोगो में 999 बार असफल हुए थे | अब आप ही विचार कीजिये यदि ये लोग भी अपने मार्ग में आई असफलताओ से निराश होकर बैठ जाते तो क्या होता? लेकिन उन्हें ऐसा नही किया , उन्होंने अपनी असफलताओ से सीख और अपनी गलतियों को सुधारते हुए सफलताओ के मुकाम को हासिल किया | किसी महापुरुष ने ठीक ही कहा है की "जीतने वाले कभी हार नही मानते और हार मान बैठने वाले कभी नही जीत नही सकते | "
हम सभी के जीवन में ऐसे समय आते है जब सब कुछ हमारे विपक्ष में होता है , हमारे द्वारा लिए गए निर्णय सही साबित नही हो रहे होते है , सब कुछ गलत हो रहा होता है | ऐसी विपरीत परिस्थतियों में निराशा को अपने उपर हावी नही होने देना चाहिए . बल्कि असफलताओं के पीछे के कारणों का पता लगाकर उन्हें सही करके सफलताओ में बदलने की कोशिश करनी चहिये | इस सन्दर्भ में अब्राहम लिंकन का उदाहरण भी प्रेरणाप्रद है | वह 21 वर्ष की आयु से ५१ वर्ष की आयु तक लगातार असफल होते रहे , अंततः वह 52 वर्ष की आयु में अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में चुने गए | उन्होंने सिद्ध कर दिया की असफलता से सब कुछ समाप्त नही हो जाता , असफलता निराशा में डूबकर हथियार डाल देने के लिए नही कहती बल्कि इससे मिले अनुभवों के साथ नए सिरे से शुरुआत करने के लिए प्ररित करती है |
विवेकानंद ने भी कहा है की " असफलता की चिंता मत करो ये बिलकुल स्वाभाविक है , असफलताए जीवन का सौन्दर्य है | उनके बिना जीवन क्या होता , जीवन मै यदि संघर्ष न रहे , तो जीवित रहना ही व्यर्थ है - इसी संघर्ष में जीवन का काव्य है | "
सामान्ययतया बड़े कार्यो में कामयाबी की शुरुआत असफलता से होती है , वैसे भी असफलताओ के बिना प्राप्त सफलताए व्यक्ति को सफलता का उचित आनंद प्रदान नही कर पाती , और वह जीवन को सुन्दर बनाने वाले अनेक अनमोल अनुभवों से वंचित रह जाता है | मत भूलिए की बचपन में पहली बार ठीक से खड़े होने से पूर्व आप कितनी बार गिर पड़े थे , बिन सहारे के पहली बार दो कदम आगे बढाते समय भी आपको पहली बार में सफलता नही मिली थी , न ही हममें से कोई वर्णमाला का पहला अक्षर बिन असफलता के सिख पाया था तो फिर अब बड़े होने के बाद हम क्यों हर कार्य में एक ही बार में सफलता की कामना करते है | हम क्यों भूल जाते है की मनुष्य सीखकर ही सफलता प्राप्त कर सकता है और सीखने के क्रम में तो गलतियाँ होना स्वाभाविक है , न ही गलतियाँ करना की अपराध है क्योंकि हमारे द्वारा की गई गलतियाँ हमें बतलाती है की किसी कार्य की पूर्णता के लिए हमें क्या करना चाहिए और क्या नही करना चाहिए |, इस प्रकार गलतियों से प्राप्त सीख हमें नया आत्मबल प्रदान करती है |
अतः अपने आदर्श , अपने लक्ष्य को सामने रखकर हजार बार आगे बढ़ने का प्रयत्न करो , अगर तुम हजार बार भी असफल होते हो तो भी फिर से प्रयत्न करो | इसके लिए हरिवंश राय बच्चन की कुछ पंक्तियाँ मुझे याद आ रही जो निम्न है |
असफलता एक चुनोती है, स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई , देखो और सुधार करो ||
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम ||
कुछ किए बिना ही जय जयकार नही होती
कोशिश करने वालो की कभी हार नही होती ||
Disclaimer : - यह पंक्तियाँ हरिवंश राय बच्चन जी की कविता से ली गयी है |
निष्कर्ष

1 Comments
Right sir Ji
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